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हर कोई नहीं केवल ये पुरुष ही दे सकते है श्राप!


श्राप देने की परम्परा पुराने समय से चली आ रही है। हिन्दू धर्मो के आधार पर श्रापों कि बहुत अधिक मान्यता थी इन श्रापों से बड़े से बड़े देवतागण भी वंचित नहीं रहे तथा यह श्राप जिस किसी को भी लगता है। उसे उसके फल स्वरुप परिणाम मिल ही जाता है।

ये लोग ही दे सकते है श्राप:

# महाभारत में युद्ध के बाद गांधारी ने श्रीकृष्ण को श्राप दिया था कि जिस प्रकार पांडव और कौरव आपसी फूट के कारण नष्ट हुए थे ठीक उसी प्रकार आज से छत्तीसवें वर्ष तुम भी अपने बंधू-बंधवो का वध करोगे।

# महाभारत में युद्ध के बाद युधिष्ठिर ने शोक में आकर (दुखी होकर) पूरी स्त्री जाती को श्राप दिया था कि वे कोई भी बात हो किसी से छिपा नहीं पाएंगी और यह श्राप आज भी पूरी स्त्री जाती को लगा हुआ है।

# महाभारत में युद्ध से पहले उर्वशी ने अर्जुन को श्राप दिया था कि वह नपुंशक हो जाएगा और उसे स्त्रियों में नर्तक बनकर रहना पड़ेगा।

# राजा अनरण्य और रावण के बीच युद्ध हुआ था उस युद्ध में राजा अनरण्य कि मृत्यु हो गयी थी राजा अनरण्य मरने से पहले रावण को श्राप दिया था रघुवंशी ही तेरी मौत का कारण बनेगा।

# तुलसी ने भगवान गणेश को श्राप दिया था कि उनका विवाह उनके इच्छा अनुसार नहीं होगा।

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