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शशिकला शेषाद्री से कैसे बनी मीनाक्षी शेषाद्री, जानें ये राज


एक फ़िल्मी रंग बिरंगी दुनिया भी इतनी आसान नहीं है। इसमें एक्ट्रेस कई मुश्किल दौर से गुजरना पड़ता है। फ़िल्मी रंग कुछ ऐसा होता है कि एक बार आप इसमें रंग जाएं तो फिर बड़ी ही मुश्किल से यह आपके मिजाज़ से उतरता है। लेकिन एक एक्ट्रेस हर तरफ जिसके चर्चे रहे हों जो अचानक से सबसे खुद को काट कर बॉलीवुड ही नहीं देश तक छोड़ देती है तो यह कोई रहस्य ही तो है। 

शशिकला शेषाद्री बनी  मीनाक्षी शेषाद्री:

तब उनका नाम था शशिकला शेषाद्री। किसी समाचारपत्र में छपी उनके चेहरे पर जब मनोज कुमार की नज़र पड़ी तभी उन्होंने तय कर लिया कि उनकी फ़िल्म 'पेंटर बाबू' की हीरोइन वही होंगी और बिना स्क्रीन टेस्ट के मीनाक्षी का फ़िल्मी सफ़र शुरू हो गया। 

बॉलीवुड में मौजूद थी शशिकला:

एक अड़चन जो था वो था शशिकला का नाम क्योंकि इस नाम की एक हीरोइन पहले से ही हिंदी फ़िल्मों में मौजूद थीं तब तय हुआ कि शशिकला को बॉलीवुड की दुनिया मीनाक्षी शेषाद्री के नाम से जानेगी। लेकिन पेंटर बाबू' बुरी तरह फ्लॉप रही और इस बात से मीनाक्षी ने हिंदी सिनेमा को छोड़ने का मन बना लिया था। 

रातों-रात बन गयी स्टार :

तभी शोमैन सुभाष घई फ़िल्म 'हीरो' के लिए हीरोईन की तलाश में जुटे थे और उनकी ये तलाश मीनाक्षी पर आकर ठहर गई। लेकिन, मीनाक्षी तैयार नहीं थीं। सुभाष घई ने बड़ी मिन्नत की तब जाकर वो कहीं राजी हुईं और साल 1983 में रिलीज़ हुई 'हीरो' ब्लॉकबस्टर साबित हुई। मीनाक्षी शेषाद्री रातों-रात स्टार बन गई।

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