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रहस्य: आखिर कब और क्यों मरने के बाद भी भटकती है इंसान की आत्मा??


इंसान का जीवन सुख दुःख का चक्र है। यहाँ हर इंसान अपने जीवन में आ रही समस्याओं से परेशान होता है कुछ लोग इन सारी समस्याओं से लड़ जाते हैं तो कुछ लोग खुद ही बिखर जाते हैं। अक्सर लोग इन समस्याओं से लड़ने की बजाए खुद ही परेशान हो जाते हैं और इतने ज्यादा परेशान हो जाते है कि खुद को ही खत्म करना समस्या का समाधान समझने लगते हैं।

और भटकने लगती है आत्मा:

# इंसान की मृत्यु होना स्वाभाविक प्रक्रिया है लेकिन उसका एक निर्धारित समय होता है बस जाने का तरीका अलग-अलग होता है लेकिन जो लोग इस नियम के विपरीत जाकर समय से पहले ही अपनी मृत्यु निर्धारित करते है उन्हें भला मुक्ति कैसे मिल सकती है?

# आत्महत्या के बाद आत्मा अधर में लटक जाती है ना तो वो स्वर्ग या नरक जा पाती है और ना ही वह जीवन में वापस  आ पाती है। वह तब तक अपने स्थान पर नहीं जाती जब तक उसका समय नहीं हो जाता है। 

# इंसान का जीवन पूरा होने से पहले ही मृत्यु हो जाने से वो प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाती और जब तक वह पूरी नहीं होती, आत्मा यूँ ही अकेली भटकती रहती है और जीवन में वापिस जाने की लालसा और अपनी ख्वाशिओं के अधुरेपन के दुखों से कष्टों में रहती है।

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