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आखिर क्यों ब्राहमण भोजन में नहीं करते लहसुन और प्याज का सेवन, आइये जानें !


अक्सर हम लहसुन और प्याज का सेवन करते है।  किन्तु क्या आप जानते है कि ब्राहमण इसका उपयोग अपने भोजन में क्यों नहीं करते है ? इसका क्या कारण है कि आज भी ब्राम्हण समाज के लोग प्याज व लहसुन को खाना वर्जित मानते है. आइये जानते है।

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ये है मान्यता :

# जब देवों व दानवों ने मिलकर अमृत की प्राप्ति हेतु समुद्र मंथन किया था उस समय अमृत देवों के भाग में आया था। राहु ने छल से देवताओं का रूप धारण कर अमर होने के उद्देश्य से अमृत प्राप्त किया। भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन से राहु का शीश उसके धड़ से अलग कर दिया। राहु के खून की कुछ बूँदें नीचे पृथ्वी पर गिर गई जिससे प्याज और लहसुन की उत्पत्ति हुई इसी वजह से इन्हें खाने से ब्राहमण को अशुद्ध मानते है।

# एक अन्य मान्यता के अनुसार प्याज व लहसुन को तामसिक भोजन माना जाता है तथा इसे खाने से व्यक्ति के अन्दर तामसिक भावना क्रोध अहंकार, कामुकता, विनाश आदि उत्पन्न होते है जिसके कारण व्यक्ति का मन अशुद्ध होता है और उसमे तामसिक प्रवृत्ति का जन्म होता है जिसके कारण ब्राहमण इसे खाना वर्जित मानते है।


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