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घर में कोई न हो तब ही देखे बॉलीवुड की ये फिल्मे वरना हो सकता है बवाल !!


आज फ़िल्मी इंडस्ट्री हकीकत से बहुत आगे निकल चुकी है इसको समाज की कोई फ़िकर नहीं है बस बॉक्स ऑफिस कलेक्शन पर नजर रहती है। हम सभी बचपन के उस दौर से गुजरे हैं, जब हम आपने पैरेंट्स के साथ कोई फिल्म देख रहे होते थे और तभी उसमें कोई बोल्ड सीन आता था तो हमें पानी लेने भेज दिया जाता था।

हम बड़े हो गए गए है:                                                                                                                                                                 
जो फिल्में हमें पसंद होती हैं वो या तो उसे ‘वल्गर’ लगती हैं या ‘घिनौनी’। ऐसे में हमें पैरेंट्स के साथ ‘दंगल’ टाइप फिल्में देखनी पड़ती हैं और ‘गर्लफ्रेंड’ के साथ ‘आशिकी-2’ टाइप। मगर इन दो टाइप के अलावा भी कई ऐसी फिल्में होती हैं, जो हमें पसंद आती हैं।

अकेले ही देखें ये फ़िल्में:

# अनुराग कश्यप की इस फिल्म में गोलियां और गालियां जी खोलकर बरसाई गई हैं। मगर इस बदले की कहानी को जिस वास्तविक तरीके से फिल्माया गया है उसका कोई जवाब नहीं है।

# फिल्म ‘हंटर’ का हीरो मंदार सेक्स की तुलना पोटी करने से करता है। उसका मानना है कि सेक्स करना पोटी करने की तरह इंसान की बेसिक नीड होती है। अब आप समझ ही गए होंगे कि ये फिल्म लड़कों को अकेले में क्यों देखनी चाहिए? 

# रक्त चरित्र’ राम गोपाल वर्मा की बेहतरीन फिल्मों में से एक है। ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ की तरह ये फिल्म भी बदले की कहानी है। ये भी दो पार्ट्स में बनाई गई है। इसमें भी गोलियां, गालियां और खून की भरमार है। 

# कानू बहल के निर्देशन में बनी इस फिल्म को देखकर आप परेशान भी हो सकते हैं। इसमें खुलकर खून-खराबा दिखाया गया है। फिर भी ज़िंदगी का यह बदसूरत पहलू आपको जरूर देखना चाहिए, मगर अकेले में।

# कई सारे अवार्ड्स अपने नाम करने वाली फिल्म ‘बी.ए. पास’ इरोटिक होने के वावजूद एक स्ट्रांग मैसेज देती है। सेक्स और क्राइम के तड़के वाली इस फिल्म को आपके लिए अकेले में ही देखना बेहतर है।

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