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क्या शारीरिक सम्बन्ध वाकई में है प्यार का ही एक स्वरूप, जानिए


प्रेम की शक्ति इंसान में उत्साह उत्पन्न करती है, लेकिन आज के परिवेश में प्रेम के मायने ही बदल गए हैं। मुहब्बत के अस्तित्व पर आज सैक्स का कब्जा हो गया है। प्रेम चटपटा मसाला मात्र बन गया है। सच्चे प्रेम से खिलवाड़ करना किसी बड़े अपराध से कम नहीं है। प्रेम मनुष्य को अपने अस्तित्व का वास्तविक बोध करवाता है। प्रेम की शक्ति इंसान में उत्साह पैदा करती है। 

शारीरिक सम्बन्ध वाकई में है प्यार का स्वरूप:

# आज प्रेम के मानदंड तेजी से बदल रहे हैं। त्याग, बलिदान, निश्छलता और आदर्श में खुलेआम सैक्स शामिल हो गया है।  प्रेम की आड़ में धोखा दिए जाने वाले उदाहरणों की शृंखला छोटी नहीं है और शायद इसी की जिम्मेदारी बदलते सामाजिक मूल्यों और देरी से विवाह, सच को स्वीकारने पर डाली जा सकती है। 


# प्रेम को यथार्थ पर आंका जा रहा है। शायद इसी कारण प्रेम का कोरा भावपक्ष अस्त हो रहा है यानी प्रेम की नदी सूख रही है और सैक्स की चाहत से जलराशि बढ़ रही है।


# आज के मल्टी चैनल युग में टीवी और फिल्मों ने जानकारी नहीं मनोरंजन ही परोसा है। समाज द्वारा किसी भी रूप में भावनाओं का आदर नहीं किया जाता। प्रेम का मधुर एहसास तो कुछ सप्ताह तक चलता है। अब तन के उपभोग की अपेक्षा है।


# प्रेम अब सड़क, टाकीज, रेस्तरां और बागबगीचों का चटपटा मसाला बन गया है। वर्तमान प्रेम क्षणिक हो चला है, वह क्षणभर दिल में तूफान ला देता है और अगले ही पल बिलकुल खामोश हो जाता है। युवा आज इसी क्षणभर के प्रेम की प्रथा में जी रहे हैं।


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