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शरद पूर्णिमा की रात कट जाते है रोगियों के रोग, करने होंगे ये काम


हिन्दू धर्म में शरद पूर्णिमा की रात को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि यह सबसे अनोखी रात होती है और इस रात आसमान से धरती पर अमृत की बारिश होती है। शरद पूर्णिमा को अमृत वर्षा वाली पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है और इस दिन चंद्रमा की ऊर्जा को ग्रहण करना लाभदायक होता है। शरद पूर्णिमा को सबसे बड़ी पूर्णिमा कहा जाता है।

होते है इसके कई फायदे:

# खीर: दूध में लैक्टिक अम्ल और अमृत तत्व होता है और यह तत्व किरणों से अधिक मात्रा में शक्ति का शोषण करता है। इसी के साथ चावल में स्टार्च होने के कारण यह प्रक्रिया और आसान हो जाती है।

# चांदनी में स्नान: इस दिन खीर को चांदी के पात्र में बनाना चाहिए क्योंकि चांदी में प्रतिरोधकता अधिक होती है और उससे विषाणु दूर रहते हैं। इसमें हल्दी का उपयोग निषिद्ध है और प्रत्येक व्यक्ति को कम से कम 30 मिनट तक शरद पूर्णिमा का स्नान करना चाहिए और इसके लिए रात्रि 10 से 12 बजे तक का समय उपयुक्त रहता है।

# दमा मरीज: शरद पूर्णिमा की रात दमा रोगियों के लिए वरदान बनकर आती है और इस रात्रि में दिव्य औषधि को खीर में मिलाकर उसे चांदनी रात में रखकर प्रात: 4 बजे सेवन करने से लाभ होता है। रात्रि जागरण के बाद दमा मरीज को दवाई खाने के बाद पैदल चलना लाभदायक रहता है।

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