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शीतला अष्टमी: इस महामंत्र के जाप से मिलेगा सुखी और निरोगी होने का वरदान !!


शीतला माता की पूजा, साधना प्राचीनकाल से ही की जाती रही है। गृहस्थों के लिए मां की आराधना दैहिक तापों ज्वर, राजयक्ष्मा, संक्रमण तथा अन्य विषाणुओं के दुष्प्रभावों से मुक्ति दिलाती हैं।इस दिन की जाने वाली साधना से प्रसन्न होकर माता शीतला ज्वर, चेचक, कुष्ठ रोग, दाहज्वर, पीतज्वर, फोड़े तथा अन्य चर्मरोगों से मुक्त होने का आशीर्वाद प्रदान करती हैं।

सुखी और निरोगी होने का वरदान:

# दैहिक तापों से मुक्त: इस व्रत को करने वाले साधक ही नहीं बल्कि उसके कुल में भी यदि कोई असाध्य रोगों से पीड़ित हो, तो माता के आशीर्वाद से वह दूर हो जाते हैं।

''शीतले त्वं जगन्माता शीतले त्वं जगत्पिता।
शीतले त्वं जगद्धात्री शीतलायै नमो नमः।। 

हे माता शीतला! आप ही इस संसार की आदि माता हैं, आप ही पिता हैं और आप ही इस चराचर जगत को धारण करतीं हैं, अतः आप को बारंबार नमस्कार है। 

# निरोगी होने की चाह: माता शीतला का यह पौराणिक मंत्र ''ॐ ह्रीं श्रीं शीतलायै नमः'' भी प्राणियों को सभी संकटों से मुक्ति दिलाते हुए समाज में मान-सम्मान, पद एवं गरिमा की वृद्धि कराता है। 

जो भी भक्त भक्ति-भाव से शीतला मां की नित्यप्रति आराधना करते हैं, मां उन पर अनुग्रह करती हुई, उनके घर-परिवार की सभी विपत्तियों से रक्षा करती हैं।

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