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अब भारत में बहुत जल्दी बंद हो जायेगा डीजल कारों का उत्पादन, सामने आई ये बड़ी वजह


हाल ही में डीजल कारें बहुत चलन में है। करीब एक दशक पहले भारत में डीजल कारों के आगमन का जबरदस्त स्वागत किया गया था। ताकत और किफायत जैसी विशेषताओं की वजह से यूरोप से चल कर भारत पहुंचने वाले अत्याधुनिक और उन्नत डीजल इंजनों ने भारतीय कार बाजार की पूरी दुनिया ही बदल दी थी। लेकिन एक दशक बाद ही डीजल कारों का रंग फीका पड़ गया है।

बंद होगा डीजल कारों का उत्पादन:

मारुति ने घोषित कर दिया है कि वह 1 अप्रैल 2020 से डीजल कारों का उत्पादन नहीं करेगी। डीजल कार मॉडल ज्यादा रखने वाली महिंद्रा ऐंड महिंद्रा भी अब समूचे रेंज में पेट्रोल इंजन लाने पर विचार कर रही है। टाटा मोटर्स भी डीजल मॉडल घटाने पर विचार कर रही है। इसलिए सवाल उठता है कि आखिर डीजल कारों के साथ समस्या क्या है?


क्या है इसकी बड़ी वजह:

पेट्रोल और डीजल की कीमतों में अंतर निरंतर घटने लगा। अब तो डीजल और पेट्रोल की कीमत में करीब 7 रुपये प्रति लीटर का ही अंतर रह गया है। इसकी वजह से डीजल कारों की बिक्री भी घटने लगी। साल 2018-19 में कुल पैसेंजर व्हीकल में डीजल व्हीकल का हिस्सा घटकर 22 फीसदी तक आ गया।

मारुति द्वारा डीजल कारों का उत्पादन बंद करने की एक बड़ी वजह है देश का नया उत्सर्जन मानक भारत स्टेज-6 (BS-VI) जो एक अप्रैल 2020 से लागू होना है। डीजल इंजनों को इस मानक के अनुरूप बनाने के लिए कंपनियों को भारी खर्च करना होगा। इसलिए डीजल से बाहर ही निकल जाना उनके लिए मुफीद लग रहा है। 

भारत उत्सर्जन के मामले में जो मानक BS-VI लागू करने जा रहा है, उस स्तर का मानक यूरोप में पांच साल पहले ही लागू हो चुका है। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने प्रतिबद्धता जताई है कि नए मानक को 1 अप्रैल 2020 से ही लागू किया जाएगा। 


सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद दिल्ली में 10 साल से पुराने डीजल ट्रकों की एंट्री पर रोक लग गई है और 10 साल से पुराने डीजल वाहन नहीं बेचे जा सकते है। 

बर्लिन, लंदन, पेरिस जैसे प्रमुख यूरोपीय शहरों में डीजल कारों में बैन के कार्यक्रम शुरू हो गए हैं। साल 2015 में एक बड़ा स्कैंडल सामने आया था, जिसमें फॉक्सवैगन ने यह स्वीकार किया था कि उसने उत्सर्जन मानक के पालन के दावे में धोखाधड़ी की है। पोर्शे, टोयोटा, मित्सुबिशी जैसी कंपनियां यूरोप में डीजल कारें बेचना बंद कर चुकी हैं।

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