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सर्वे में हुआ खुलासा: 40% महिलाएं है Uterus TB की शिकार, रह सकती है बांझ


माँ बनना हर लड़की का सपना होता है। गर्भाशय टीबी महिलाओं को होने वाला एक रोग है। इसके कारण महिलाएं बांझपन का शिकार भी हो जाती है। माइको बैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस नामक जीवाणु के कारण होने वाला यह रोग फेफड़ों को अधिक प्रभावित करता है। 

0% महिलाएं है Uterus TB की शिकार:

शोधों के अनुसार, इंफेक्शन, इस टीबी का सबसे मुख्य कारण है, जिसके परिणामस्वरूप भारत में 25-30% महिलाओं में बांझपन का शिकार हो रही है। यह बीमारी पुरूषों में भी हो सकती है लेकिन महिलाओं को इसका ज्यादा खतरा रहता है। 

यूटरस टीबी क्या है:

गर्भाशय टीबी में बीमारी गर्भाशय के पार्ट्स अंडाशय, फैलोपियन ट्यूब, गर्भाशय का मुंह और वजाइना या वजाइना के मुख में आसपास के लिम्फ नोड्स में होता है। यह रोग आम तौर पर इंफेक्शन के कारण होता है, जिससे शरीर के अन्य भागों के साथ फेफड़े भी प्रभावित होते हैं।

बनाता है बांझपन का शिकार:

अगर बैक्टीरिया गर्भाश्य पर हमला करते हैं तो महिलाओं में बांझपन का खतरा बढ़ जाता है। टीबी से फैलोपियन ट्यूब को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचता है। किसी भी प्रकार के टीबी से ग्रस्त 30% महिलाओं में गर्भाशय टीबी विकसित हो सकता है। 

5-10% में हाइड्रो सल्पिंगिटिस होता है, जिसमें पानी ट्यूब में भर जाता है, जो बांझपन का खतरा बढ़ाता है। वहीं टीबी बैक्टीरिया मुख्य रूप से फैलोपियन ट्यूब को बंद करता है, जिससे पीरियड्स रेग्युलर नहीं आते या पूरी तरह से रुक जाते हैं। 

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