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भगवान गणेश जी की पूजा इस बात का रखें विशेष ध्यान, वरना पड़ जायेगा उल्टा


हिन्दू धर्म में किसी भी शुभ कार्य करने से पहले भगवान गणेश की पूजा जरूर की जाती है क्योंकि उन्हें रिद्धि और सिद्धि का स्वामी माना जाता है और सभी देवताओं में परम पूज्य माने जाते हैं। गणेशजी की पूजा में कई चीजें चढ़ाई जाती है जिसमें दूर्वा का विशेष महत्व होता है। इसके बिना गणेश जी की पूजा अधूरी समझी जाती है।

क्या है मान्यता:

पुराणों के अनुसार एक असुर रहा करता था जिसका नाम अनलासुर था। जो स्वर्ग से लेकर पृथ्वी तक सभी को परेशान करता था। वह ऋषि-मुनियों, देवताओं और आम लोगों को जिंदा ही खा जाया करता था। तब सभी देवता इस राक्षस के  पीछा छुडाने के लिए महादेव के पास कैलाश पर्वत जा पहुंचे।

दूर्वा चढ़ाने की परंपरा:

सभी देवी-देवताओं की बात सु्नकर शिवजी ने कहा कि अनलासुर का अंत केवल गणेश ही कर सकते हैं। इसके बाद भगवान गणेश ने अनलासुर को निगल लिया जिसकी वजह से उनके पेट में जलन होने लगी जो शांत ही नहीं हो पा रही थी। तब कश्यप ऋषि ने दूर्वा की 21 गांठ बनाकर गणेश जी को खाने के लिए दी। तब जाकर  पेट की जलन शांत हो गई। तभी से गणेश जी को दूर्वा चढ़ाने की परंपरा शुरू हुई।

ना करें तुलसी के पत्ते का इस्तेमाल :

गणेश पूजा में तुलसी के पत्ते नहीं चढ़ाए जाते हैं। विष्णु पुराण के अनुसार एक बार तुलसी गणेश जी को देखकर उन पर मोहित हो कर उनसे विवाह करने की इच्छा जाहिर की, लेकिन गणेशजी ने उनके प्रस्ताव को ठुकरा दिया। इस बात को लेकर तुलसी जी ने उन्हें गुस्से मे दो विवाह करने का श्राप दे दिया ।

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