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हनुमान जी के भक्तों पर कभी नहीं पड़ती शनि की वक्री दृष्टि, ये है वजह


हनुमानजी कलियुग के देवता है। हनुमान जी की तो वह अपने भक्तों पर हमेशा कृपा बनाए रखते हैं और उनके भक्तों पर शनिदेव भी अपनी कृपा सदा रखते हैं। ऐसे में हनुमान भक्त सदा शनि की वक्री दृष्टि से बचे रहते हैं और कहा जाता है इसके पीछे का कारण भी बहुत अद्भुत है।

नहीं पड़ती शनि की वक्री दृष्टि:

जब रावण के पुत्र का जन्म होने वाला था, तो उसने समस्त ग्रहों को कुंडली के ग्यारहवें भाव में बाँध दिया था किन्तु शनिदेव ने अपना एक पैर कुंडली के बारहवे भाव में रख दिया और इसी कारण रावण का पुत्र अमर न हो सका। क्रोध में रावण ने शनिदेव का एक पैर तोड़ दिया और उन्हें बंदी बनाकर अपने कारागृह में डाल दिया था। जब भगवान राम का सन्देश लेकर हनुमान जी देवी सीता के पास अशोक वाटिका पहुंचे, तो उन्होंने शनिदेव को आज़ाद कराकर आसमान में दूर फेंक दिया।

शनिदेव ने बजरंगबली को वचन दिया था कि वे लंका का नाश करने में हनुमान जी की मदद करेंगे। शनिदेव ने इसी स्थान से लंका पर अपनी वक्री दृष्टि डाली और लंका जलकर भस्म हो गयी।

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