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अब नहीं बिकेगा राजस्थान का छबड़ा और कालीसिंध पावर प्लांट, कांग्रेस का बड़ा फैसला


हाल ही में कांग्रेस सरकार ने घोषणा की थी कि राजस्थान में खजाना हो गया है लेकिन इसके चलते मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अध्यक्षता में बुधवार को मुख्यमंत्री कार्यालय में आयोजित राज्य मंत्रिमंडल एवं मंत्रिपरिषद की बैठक में छबड़ा और कालीसिंध तापीय विद्युत गृह की परिचालन कार्य क्षमता और वित्तीय स्थिति में उल्लेखनीय सुधार होने के कारण राज्य कैबिनेट ने इन दोनों पावर स्टेशनों का विनिवेश नहीं किए जाने के प्रस्ताव का अनुमोदन किया। भाजपा सरकार ने प्रदेश के ऊर्जा संयंत्रों को बेचने और निजीकरण के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी।

छबड़ा और कालीसिंध पावर प्लांट:

सरकार ने 18 जून 2018 को आदेश जारी कर सहायक अभियंता से लेकर मुख्य अभियंता तक तकनीकी अधिकारियों के 151 और अधीनस्थ तकनीकी कर्मचारियों के 94 पद खत्म किए थे। सरकार ने इसकी भनक तक नहीं लगने दी, लेकिन जब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी तो ऊर्जा विभाग ने खत्म हुए पदों के आधार पर कार्मिकों के तबादले शुरू कर दिए, तब जाकर मामले का खुलासा हुआ। 

राजस्थान पत्रिका ने 21 जून के अंक इस मामले को प्रमुखता से उजागर किया था। कांग्रेस के प्रदेश महासचिव पंकज मेहता ने बताया क गहलेात सरकार ने विनिवेश नहीं करने का प्रस्ताव पारित कर संदेह को दूर कर दिया है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत 30 जून को छबड़ा में दो सुपर क्रिटिकल इकाइयों का लोकार्पण करने आ रहे है।

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