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इंसान के मरने के बाद उसके पैर दक्षिण दिशा में ही क्यों किये जाते है ??


हर दिशा में कोई न कोई ग्रह स्थित है जो कि अपना अच्छा या बुरा प्रभाव डालता है। यह निर्भर करता है मकान के वास्तु, मुहल्ले के वास्तु और उसके आसपास स्थित वातावरण और वृक्षों की स्थिति पर। प्रत्येक ग्रह का अपना एक वृक्ष होता है। जैसे चंद्र की शनि से नहीं बनती और यदि आपने घर के सामने चंद्र एवं शनि से संबंधित वृक्ष या पौधे लगा दिए हैं तो यह कुंडली में चंद्र और शनि की युति के समान होते हैं जो कि विषयोग कहा गया है।

दक्षिणमुखी में मकान क्यों नहीं रहना चाहिए:

# दक्षिण में यम और यमदूतों का निवास होता है। दक्षिण दिशा में मंगल ग्रह है। मंगल ग्रह एक क्रूर ग्रह है। दक्षिण दिशा में दक्षिणी ध्रुव है जिसका नकारात्मक प्रभाव बना रहता है।

# दक्षिण दिशा से अल्ट्रावायलेट किरणों का प्रभाव ज्यादा रहता है जो सेहत के लिए ठीक नहीं है। दक्षिण दिशा में सूर्य सबसे ज्यादा देर तक रहता है जिसके कारण मकान का मुख द्वार तपता रहता है। इसके चलते घर में ऑक्सिजन की कमी हो जाती है।

# दक्षिण दिशा में पैर करके सोने से जिस तरह वह हमारे शरीर की ऊर्जा को खींच लेता है उसी तर वह मकान के भीतर की ऊर्जां को भी खींच लेता है।

# दक्षिण दिशा में पैर करके सोने से फेफड़ों की गति मंद हो जाती है। इसीलिए मृत्यु के बाद इंसान के पैर दक्षिण दिशा की ओर कर दिए जाते हैं ताकि उसके शरीर से बचा हुआ जीवांश समाप्त हो जाए।

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