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रावण के पास क्यों थे दस सिर, आप नहीं जानते होंगे इसके रहस्य


कुछ विद्वान मानते हैं कि रावण के दस सिर नहीं थे किंतु वह दस सिर होने का भ्रम पैदा कर देता था इसी कारण लोग उसे दशानन कहते थे। इसी के साथ कई लोगों के अनुसार रावण छह दर्शन और चारों वेद का ज्ञाता था इसीलिए उसे दसकंठी भी कहा जाता था।

रावण के पास क्यों थे दस सिर:

कई जगह इस बात का उल्लेख है कि रावण के दस सिर दस बुराइयों के प्रतीक हैं। जिनमे काम, क्रोध, लोभ, मोह, द्वेष, घृणा, पक्षपात, अहंकार, व्यभिचार, धोखा ये सभी शामिल हैं।  रावण महर्षि विश्वा और कैकसी नामक राक्षसी के पुत्र थे और रावण को अपने पिता महर्षि विश्वा से वेद-शास्त्रों का ज्ञान मिला था और अपनी माता कैकसी से राक्षसी प्रवृति मिली थी।

रावण ने ब्रह्मा जी को प्रसन्न करने के लिए कठोर तप किया था। अपनी तपस्या के दौरान, रावण ने ब्रह्मा को प्रसन्न करने के लिए 10 बार अपने सिर को काट दिया। हर बार जब वह अपने सिर को काटता था तो एक नया सिर प्रकट हो जाता था। इस प्रकार वह अपनी तपस्या जारी रखने में सक्षम हो गया। अंत में, ब्रह्मा, रावण की तपस्या से प्रसन्न हुए और 10 वें सिर कटने के बाद प्रकट हुए और उन्हें वरदान मांगने को कहा। इस पर रावण ने अमरता का वरदान मांगा लेकिन ब्रह्मा जी ने उन्हें अमरता का आकाशीय अमृत प्रदान किया। 

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